मुहूर्त
चौघड़िया
हिन्दू दिन और रात्रि प्रत्येक आठ डेढ़-घंटे के चौघड़ियों में विभाजित हैं। अमृत, शुभ और लाभ नए कार्यों के लिए शुभ हैं; चर तटस्थ है; उद्वेग, काल और रोग वर्जित हैं। ये अवधि New Delhi के सूर्योदय-सूर्यास्त से गणना की जाती हैं।
चौघड़िया गणना हो रही है…
चौघड़िया को समझें
चौघड़िया (चौघड़िया) एक वैदिक पद्धति है जिससे दैनिक कार्यों — यात्रा, भेंट, क्रय, संस्कार — हेतु शुभ अवधियाँ चुनी जाती हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक का दिन आठ समान भागों में और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात्रि आठ और भागों में बाँटी जाती है। प्रत्येक अवधि का एक स्वामी ग्रह और एक निश्चित स्वभाव होता है।
- अमृत (चन्द्र) — सर्वाधिक शुभ; किसी भी नए आरम्भ हेतु उत्तम।
- शुभ (गुरु) — संस्कार और अध्ययन हेतु अनुकूल।
- लाभ (बुध) — लाभ, व्यापार, आर्थिक कार्य।
- चर (शुक्र) — सम; यात्रा और लघु कार्यों हेतु उपयुक्त।
- उद्वेग (सूर्य) — अशान्ति; महत्वपूर्ण कार्य से बचें।
- काल (शनि) — नए उपक्रम से बचें।
- रोग (मंगल) — रोग/विवाद; स्वास्थ्य और विधिक विषयों से बचें।
